अर्थव्यवस्था

खनिज संपदा

जिले में खनिजों के दोहन के लिए अभी तक कोई सुविधाएँ एवं आधारभूत संरचना उपलब्ध नहीं हैं। हालाँकि, यह जिला खनिज संपदा से अत्यंत समृद्ध है, लेकिन अभी तक इसका व्यापक अन्वेषण नहीं किया गया है।

उद्योग

अब तक लोंगलेंग जिले में कोई विशेष उद्योग स्थापित नहीं हुआ है। फिर भी, जिले के निवासियों में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएँ दिखाई देती हैं। जिले में हस्तशिल्प और हथकरघा से संबंधित उद्योगों की परियोजनाएँ आसानी से शुरू की जा सकती हैं।

सामाजिक-आर्थिक गतिविधियाँ

चावल यहाँ का मुख्य भोजन है तथा कृषि लोंगलेंग जिले के लोगों की आजीविका का प्रमुख आधार है। झूम खेती यहाँ कृषि का सबसे प्रचलित रूप है, हालाँकि हाल के वर्षों में कुछ क्षेत्रों में गीले धान की खेती भी की जाने लगी है।

यहाँ की प्रमुख कृषि उपज में चावल, मक्का, विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ तथा बागवानी फसलें शामिल हैं। जिले के निचले क्षेत्र और असम की सीमा से लगे तलहटी वाले भाग उपजाऊ हैं तथा वहाँ गीले धान की खेती की पर्याप्त संभावनाएँ हैं।

जिले में बहुत कम लोग सरकारी या निजी कार्यालयों में नौकरी करते हैं, जबकि अधिकांश जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है।

वनस्पति एवं जीव-जंतु

लोंगलेंग जिला प्राकृतिक वनस्पति से समृद्ध है। नागालैंड के उन कुछ स्थानों में इसकी गिनती होती है, जहाँ आज भी अछूते एवं प्राकृतिक वन पाए जाते हैं।

यहाँ उपोष्णकटिबंधीय मिश्रित वन पाए जाते हैं, जिनमें चौड़ी पत्तियों वाले सदाबहार तथा पर्णपाती वृक्षों की प्रचुरता है।

प्रमुख वनस्पतियाँ: ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बोंसुम, गोगरा, एल्डर तथा ओक की विभिन्न प्रजातियाँ प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ जंगली चेरी, जंगली सेब, जंगली नींबू, जंगली केला, जंगली अखरोट, जंगली अंजीर, खाने योग्य विभिन्न प्रकार के पौधे एवं पत्तियाँ तथा कुछ स्थानों पर बेंत और नरकट भी पाए जाते हैं।

जिले के तलहटी वाले क्षेत्रों में गोमारी, हॉलॉक, कोरोई, मेसुआ, टीटा-चापा, नीम, जंगली आम, आँवला तथा बाँस की विभिन्न प्रजातियाँ प्रमुख रूप से पाई जाती हैं। यहाँ अनेक प्रकार की झाड़ियाँ, औषधीय गुणों वाली जड़ी-बूटियाँ, लताएँ, फर्न तथा घास भी उगती हैं। पूरे जिले में अलग-अलग स्थानों पर बाँस के झुरमुट पाए जाते हैं। यहाँ बाँस की एक दुर्लभ प्रजाति भी मिलती है, जो आकार में उँगली जितनी मोटी तथा संरचना में बेंत जैसी होती है।

जिले के हरे-भरे वन विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों का आश्रयस्थल हैं। यह स्थान पशु-पक्षी प्रेमियों तथा शोधकर्ताओं के लिए विशेष महत्त्व रखता है।

प्रमुख वन्यजीव: यहाँ हिरण, भालू, मिथुन, स्लॉथ भालू, काकड़, पर्वतीय हिरण, जंगली सूअर, दुर्लभ पैंगोलिन, बंदरों की विभिन्न प्रजातियाँ, जंगली बिल्लियाँ, साही, उड़ने वाली लोमड़ी, उड़ने वाली गिलहरी, हिमालयी विशाल गिलहरी तथा अन्य प्रकार की गिलहरियाँ पाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ कस्तूरी बिलाव, साँप, अजगर और ऊदबिलाव जैसे जीव भी पाए जाते हैं।

जिले की छोटी नदियों और जलधाराओं में विभिन्न प्रकार की मछलियाँ तथा अन्य जलीय जीव पाए जाते हैं। इनमें ट्राउट मछली एक दुर्लभ प्रजाति है।

प्रमुख पक्षी: जिले में हॉर्नबिल, कबूतरों की विभिन्न प्रजातियाँ, जिनमें शाही कबूतर भी शामिल है, तोते, मामा पक्षी, पहाड़ी मोर, दुर्लभ एवं कम दिखाई देने वाला ब्लाइथ्स ट्रैगोपैन, जंगली मुर्गियों की विभिन्न प्रजातियाँ तथा अनेक छोटे पक्षी पाए जाते हैं।