लोंगलेंग जिले का प्रशासनिक परिचय
लोंगलेंग नगर की स्थापना वर्ष 1951 में हुई थी। श्री रंजन, सहायक राजनीतिक अधिकारी (Assistant Political Officer), यहाँ के प्रथम प्रशासक थे। बाद में, 24 जनवरी 2004 को लोंगलेंग को पूर्ण राजस्व जिले का दर्जा प्राप्त हुआ, जिसका नेतृत्व उपायुक्त (Deputy Commissioner) द्वारा किया जाता है।
उपायुक्त के नेतृत्व में जिला प्रशासन, कानून एवं व्यवस्था, प्रोटोकॉल, निर्वाचन, विकास संबंधी गतिविधियों तथा समय-समय पर सौंपे जाने वाले अन्य दायित्वों का संचालन किया जाता है। उपायुक्त (DC) को अतिरिक्त उपायुक्त (ADC), अतिरिक्त सहायक आयुक्त (EAC) आदि अधीनस्थ प्रशासनिक अधिकारियों तथा विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों (HODs) का सहयोग प्राप्त होता है।
जिला स्तर से नीचे की प्रशासनिक इकाइयाँ विभिन्न क्षेत्रों, गाँवों, परिवारों आदि के समूहों के आधार पर गठित की जाती हैं।
कई सर्किलों (Circles) को मिलाकर एक उप-मंडल (Sub-Division) बनाया जाता है, जिसका प्रशासनिक प्रमुख उप-मंडल अधिकारी (SDO) होता है। हालाँकि, कुछ उप-मंडलों को उन्नत करके अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) मुख्यालय का दर्जा दिया गया है। इन मुख्यालयों के प्रमुख ADC होते हैं, जिन्हें वित्तीय एवं स्थापना संबंधी कुछ अतिरिक्त या स्वतंत्र शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
एक उप-मंडल को आगे कई गाँवों के समूहों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें सर्किल (Circle) कहा जाता है। सर्किल सबसे निचली प्रशासनिक इकाई है, जिसका प्रशासनिक प्रमुख सर्किल अधिकारी (CO) होता है।
इसके अतिरिक्त, ग्रामीण विकास (RD) की योजनाओं एवं कार्यक्रमों का बेहतर प्रशासन, क्रियान्वयन और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए जिले को कुछ विकास खंडों में भी विभाजित किया जाता है, जिन्हें सामुदायिक विकास खंड (Community Development Blocks या CD-Blocks) कहा जाता है। इन विकास खंडों का नेतृत्व खंड विकास अधिकारी (Block Development Officer या BDO) द्वारा किया जाता है।